वन्देमातरम !

गरीब आदमी पार्टी के संस्थापकों में ज्यादातर वो लोग हैं , जो अन्ना जी के आन्दोलन के समय से ही रामलीला मैदान, जंतर मंतर, इंडिया गेट, आदि जगहों पर आन्दोलन के महत्वपूर्ण साथी और भीड़ का एक हिस्सा हुआ करते थे, आन्दोलन को मुकाम तक पहुंचाने के लिए बनाई गयी राजनीतिक पार्टी का भी हिस्सा रहे, एक कार्यकर्ता के रूप में दिन रात एक करके पार्टी को जन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे, क्योंकि उन्हें पार्टी के आकाओं पर पूरा भरोसा था, और उम्मीद थी कि ये देश जरूर बदलेगा, क्रान्ति होगीक्रांतिकारियों कि भांति देश भक्ति में लीन होकर नई बनी पार्टी के लिए कार्य करते रहे !

मगर दुर्भाग्य की बात है मेरे देश वासियों  ! कि यह भ्रम दिल्ली चुनाव से पहले ही टूट गया , क्योंकि उस नई  राजनीतिक पार्टी के आकाओं का असली चेहरा, इन क्रांतिकारी भाइयों  के सामने था  , उन आकाओं की कथनी और करनी में आकाश - पाताल  के समान फर्क थासाथियो -- दिल टूट चुका था क्रांतिकारियों का जिन्होंने सपने देखे थे देश को बदलने के, उदास थे, असहाय थे, पहले तो उन्होंने बड़ी कोशिश की आकाओं को सही रास्ते में लाने की, उन तक अपनी बात पहुंचाने की,   मगर देशवासियो ! सारी कोशिशें बेकार हो गईं, वो आका जिन्हें ये क्रांतिकारी, भगवान् की तरह मानने लग गए थे, उनका एक बहुत ही घिनौना रूप सामने आया !

 मेरे प्यारे देश  वाशियो ! कुछ दिनों की जद्दो जहद के बाद अंततः हमने एक अलग गरीब आदमी पार्टी बनाई है जो अब आपके सामने है|

साथियो  ! ये है, सच्चे आम आदमियों की पार्टी  गरीब आदमी पार्टी